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Saturday, 20 January 2018

मानव में हार्मोन एवं उनकी क्रियाएँ

     मानव हार्मोन और समन्वय 
     हॅार्मोन सूचनात्मक अणु हैं जो शरीर के एक भाग की अंत:स्त्रावी कोशिकाओं से स्त्रावित होते हैं और शरीर के अन्य भागों में रक्त के द्वारा ले जाये जाते हैं, जो शरीर की क्रियाओं को उत्तेजित या मन्द करते हैं। 
    
      खोज: सबसे पहले सीक्रेटिन हॅार्मोन खोजा गया था, यह दो अंग्रेज फिजियोलॅाजिस्ट विलियम एम. बेलिस और अर्नस्ट एच. स्टार्लिंग द्वारा सन् 1903 में खोजा गया था। 

     शब्द हॅार्मोन स्टार्लिंग के द्वारा 1905 में दिया गया, जिसका अर्थ ग्रीक भाषा में उत्तेजक है। पर कुछ हॅार्मोन ऐसे भी हैं जो मंदक प्रभाव भी दर्शाते हैं जैसे- सोमेटोस्टेटिन ।  

      हॅार्मोन सीधे रक्त में छोड़ा जाता है, ये अल्प जीवनकाल के होते हैं, इसलिये इन्हें संग्रह कर के नहीं रखा जा सकता। 

     वर्गीकरण: 
* एमीन हॅार्मोन- थायरॅाक्सिन, 
                      एपिनेप्रिन, 
                      नॅारएपिनेप्रिन।
* स्टेरॅाइड हार्मोन - कार्टीसॅाल, 
                         कार्टीसॅान, 
                         कार्टिकोस्टेरॅान, 
                         एल्डोस्टेरॅान, 
                         टेस्टोस्टेरॅान, 
                         प्रोजेस्टेरॅान। 
 * प्रोटीन हार्मोन - STH, 
                         TSH, 
                         FSH,
                         LH. 
* पेप्टाइड हार्मोन - इंसुलिन, 
                         ग्लुकेगॅान, 
                         ACTH, 
                         पैराथॅार्मोन, 
                         ADH, 
                         MSH. 

     विभिन्न अंत:स्त्रावी ग्रंथियों द्वारा स्त्रावित हॅार्मोन्स की संख्या- *अग्र पिट्युटरी- 7. 
*हाइपोथैलेमस- 2. 
* पीनियल बॅाडी- 2. 
*थाइमस- 3. 
* थायरॅाइड- 2. 
* पैराथायरॅाइड- 1. 
*लैंगर हैंस के द्वीप- 3. 
* एड्रीनल कॅार्टेक्स- 46. 
*एड्रीनल मेड्युला-2. *
 वृषण- 1.
  
* अण्डाशय- 3. 
*प्लेसेण्टा- 2. 
*किडनी- 2. 
* अमाशय- 1. 
* ड्युओडिनम-. 5. 
* इलियम- 2. 
     थॅामस एडीसन एण्डोक्राइनोलॅाजी के जनक कहलाते हैं, सबसे पहले पता लगाया गया अंत:स्त्रावी रोग एडीसन रोग था। हॅार्मोन भोजन में उपस्थित नहीं होते बल्कि शरीर में संश्लेषित होते हैं।

Thursday, 18 January 2018

मनुष्य के शरीर की प्रमुख हड्डियां

मनुष्य के शरीर की प्रमुख हड्डियां 
नमस्कार दोस्तों,
     हम मानव शरीर विज्ञान की बात करें तो मानव कंकाल तंत्र ( Human skeletal system) की बात करना बहुत जरूरी है। मानव कंकाल ही है जो हमारे शरीर को एक निश्चित आकार प्रदान करता है और हमें एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने में मदद करता है।
    आज हम हमारे कंकाल तंत्र के बारे में कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे। जैसे हमारे शरीर की सबसे बड़ी हड्डी,  मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी हड्डी, मानव में हड्डियों की कुल संख्या, और  भी बहुत कुछ।
(1) मानव शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं।
(2) बच्चों में कुल 301 हड्डियां होती हैं।
(3) मनुष्य के  एक हाथ में 32(2) हड्डियां होती हैं।
(4) मनुष्य के एक पैर में 31(2) हड्डियां होती हैं।
(5) मनुष्य के कपाल में 28 हड्डियां होती हैं।
(6) मनुष्य के चेहरे में 14 हड्डियां होती हैं।
(7) मनुष्य में 24 पसलियां होती हैं।
(8) पसलियों को जोडे रखने वाली हड्डि को स्टर्नम कहा जाता है।
(9) हड्डियों को हड्डियों से लिगामेंट जोड़ता है।
(10) हड्डियों को मांसपेशियों से टेंडेन जोड़ता है।
(11) हड्डियों में पाये जाने वाले प्रमुख तत्व हैं A.फास्फोरस B. कैल्शियम
(12) मनुष्य की क्लेविकल हड्डी ब्यूटी बोन कहलाती है
(13) मनुष्य की हड्डियां एक प्रकार की संयोजी ऊतक हैं।
(14) हड्डियों के अंदर का खोखला स्थान अस्थि मज्जा कहलाता है, जिसमें कि लाल रक्त कोशिका, श्वेत रक्त कोशिका, प्लेटलेट्स का निर्माण होता है।
(15) ओस्टिओपोरेसिस हड्डियों की एक बीमारी है जिसमें कैल्शियम की कमि होने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
(16) गाउट नामक बीमारी में दो हड्डियों के बीच में यूरिक एसिड का निर्माण होने लगता है।
(17) हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम के साथ साथ विटामिन डी-3 बहुत जरूरी है जो कि सूर्य की रोशनी में निर्मित होता है। 

-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत। 

Saturday, 13 January 2018

ISRO का 100वां सेटेलाइट


100th satellite by ISRO

नमस्कार दोस्तों,
     पिछले कुछ दशकों में भारत ने अपार सफलताएं प्राप्त की हैं, जिनमें से एक क्षेत्र है अंतरिक्ष विज्ञान का। पिछले कुछ समय से अंतरिक्ष विज्ञान में भारत लगातार नये नये आयामों को छू रहा है,  अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की देन लगातार बढते जा रही है। वर्ष 2018 मेें
     भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO (Indian Space Research Organization)के द्वारा शुक्रवार 12 जनवरी 2018 को एक सेटेलाइट छोडा गया जो कि हमारे देश भारत का वर्ष 2018 में पहला सेटेलाइट launch था। इसके साथ ही भारत ने अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम में सेंचुरी भी पूरी कर ली।
यह launch PSLV-C-40 के द्वारा अांध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से किया गया। इस launching में इसरो ने 28 विदेशी और 3 भारतीय सेटेलाइट को एक साथ अंतरिक्ष की ओर रवाना किया।

     गौरतलब है कि भारत ने अपना पहला सेटेलाइट अार्यभट्ट19 अप्रेल 1975 को सोवियत संघ रूस की मदद से launch किया था। जबकि दुनिया का पहला सेटेलाइट स्पूतनिक -1 1957 में सोवियत संघ के द्वारा launch किया गया था।
भले ही भारत ने अपना पहला सेटेलाइट launch करने में काफी लंबा समय लगा दिया था लेकिन आज स्थिति बहुत अलग, पहले हम बहुत से देशों पर निर्भर थे, लेकिन आज हमारे ISRO और DRDO के वैज्ञानिकों की मेहनत और लगन से हम विश्व में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई Leadership के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

     भारत के Space program की एक बडी विषेशता यह है कि हम किसी भी सेटेलाइट को अन्य देशों की तुलना में काफी कम खर्च में launch कर सकते हैं, जिससे कि हम अपने launch में उन छोटे देशों के सेटेलाइट को भी Space तक पहुंचने में सक्षम हैं जिनके पास अपने खुद के launching station नहीं हैं, या हैं तो काफी महंगे हैं।
और जानें 
NASA का इनसाइट मिशन
क्या होगा जब तियानगोंग की पृथ्वी से टक्कर होगी

-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत। 

Thursday, 11 January 2018

कीटनाशक और खरपतवार नाशक क्या है?

कीटनाशक और खरपतवार नाशक 
नमस्कार दोस्तों,
     अक्सर हम आधुनिक कृषि की बात करते हैं, तब हमें बहुत बार pesticides और weedisides जैसे शब्द सुनाई देते हैं। तो आज हम समझते हैं कि pesticides क्या हैं? और 
weedisides क्या हैं?Pesticides और weedisides में क्या Difference है? Pesticides की क्यों जरूरत है? Weediside की क्या क्षमता है? Weedisides के फायदे, pesticides का soil me effect, pesticides का मनुष्यों में असर, pesticides का पक्षियों में दुष्प्रभाव और भी बहुत कुछ। 



Pesticides क्या है? 
      छोटे- छोटे कीड़े-मकोड़ों को English में pest कहा जाता है, और cide का मतलब होता है मारना जो हमारे और हमारे उपयोगी पौधों के किसी काम के नहीं और जो जाने अनजाने में बीमारियों को फैलाते हैं। तो pesticides का मतलब हुआ pest को मारने वाला या pest को नियंत्रित करने वाला।
कभी-कभी बोलचाल की भाषा में हम Pesticides के स्थान पर insecticide शब्द का इस्तेमाल भी करते हैं।


Pesticides के मुख्य Example? 
     glyphosate, Acephate, Deet, Propoxur, Metaldehyde, Boric Acid, Diazinon, Dursban, DDT, Malathion


Biopesticides क्या है? 
ऐसे pesticides जो कि जीवितों से प्राप्त किये जाते हैं, जैसे कुछ पौधों या जीवों से।
Bacillus thuringiensis
stun fish
Neem
Gambusia
Chrysanthemum cinerariaefolium


weedicides क्या है? 
     English में खरपतवार को weed कहा जाता है, weed मतलब कि एेसे पौधे जो कि हमारे लिए और हमारी फसलों के लिए हानिकारक हैं। तो weed या खरपतवार को मारने वाला कहलाता है weedicides. Weedicides का एक अन्य नाम Herbicides भी है।


Weedisides के example? 
2 4 Dichlorophenoxy acetic acid
Naphathelene 
acetic acid
-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत।

Saturday, 6 January 2018

D.D.T. के द्वारा मच्छरों का नियंत्रण

D.D.T. के द्वारा मच्छरों का नियंत्रण 
(Mosquito control by D.D.T.)

नमस्कार दोस्तों,
     पिछले article में हमने "मच्छर और बीमारियां" की बात की थी।  आप सभी जानते ही हैं कि मच्छरों की बात हो और D.D.T. की बात न हो ऐसा कैसे हो सकता है? 

     D.D.T. एक popular कीटनाशक (pesticides) है, जिसका उपयोग पूरे विश्व में मच्छरों को मारने के लिये किया जाता है।


what is D.D.T. meaning - डीडीटी क्या है?
DDT एक बेरंग, बेस्वाद, क्रिस्टलीय और लगभग गंधहीन ऑर्गेनोक्लोराइड पदार्थ है जो इसकी कीटनाशक गुणों के लिए प्रसिद्ध है ! यह दोनों मनुष्यों और जानवरों के लिए भी जहरीला है ! यह ऊतकों (tissue)में जमा है और कई वर्षों तक Active रहता है. इसका उपयोग फसलों की रक्षा के लिए खेती और कृषि में प्रयोग किया जाता है ! जब डीडीटी पौधों पर छिड़का जाता है, पौधों पर रहने वाले कीड़े इसके साथ सामने आते हैं ! यह कीट के न्यूरॉन्स को प्रभावित करता है जिससे अंतिम मौत हो जाती है ! यह खाद्य पौधों के माध्यम से मानव जीवन चक्र पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव डालता है.

D.D.T. का पूरा नाम और Formula ?
Dichlorodiphenyltrichloroethane 
(डाईक्लोरोडाईफेनिलट्राईक्लोरोएथेन)
Formula C14H9Cl5 फार्मूले के आधार पर हम यह जान सकते हैं कि D.D.T. कार्बन (C), हाइड्रोजन (H)और क्लोरीन (Cl) से मिलकर बना हुआ है।
     D D.T. दुनिया का पहला pesticide है जिसका उपयोग मलेरिया से बचाव के लिए किया गया था,  D.D.T. की कीड़े -मकोडों (pest) को मारने की क्षमता को देखते हुए,  इसका उपयोग विशेष रूप से खेती में pest control के लिए किया जाने लगा। 

     D.D.T. का कृषि के क्षेत्र में बहुत अधिक मात्रा में उपयोग किया गया जिसके कारण मच्छरों में इसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो गई। यही कारण है कि आज D.D.T. का छिड़काव करने पर भी मच्छरों को control नहीं किया जा सकता।
 
-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत।

Wednesday, 3 January 2018

गोनोरिया - एस.टी.डी. ( Gonorrheae - S.T.D.)

गोनोरिया - एस.टी.डी.
Gonorrheae - S.T.D.
नमस्कार दोस्तों, 
क्या है गोनोरिया....??


     गोनोरिया, एक जीवाणु जिसका नाम Neisseria gonorrheae (निसेरिया गोनोरी) है, के द्वारा फैलाया जाता है, इसे Gonococcus bacteriae भी कहते हैं।
इस बैक्टीरिया के फैलने का मुख्य कारण है असुरक्षित यौन संबंध
     सबसे पुराने समय में पाए जाने वाले यौन संचारित रोगों में से एक है यह। एक बहुत अधिक चर्चित विषय गोनोरिया के बारे में यह है कि यह टॅायलेट सी, दरवाजे के हैंडल आदि के संपर्क में आने से नही फैलता, इस बैक्टीरिया को जीवित रहने, जनन करने और वृद्धि करने के लिए विशिष्ट परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, परपोषी के बाहर यह ज्यादा समय तक जीवित नही रह सकता , यह केवल शरीर की नमी वाले भाग में अपना जीवन यापन कर सकता है जैसे- योनि, गला, मूत्र नली, व गुदा द्वार में अच्छे से जीवित रह सकता है।
गोनोरिया के लक्षण:
     अधिकतर संक्रमित महिलाओं में लक्षण दिखाई नही देते, खासकर तब, जब वो संक्रमण के शुरुआती चरण में हों।
जो लक्षण दिखाइ देते हैं वो हैं.....
- पेशाब करते समय जलन।
- बार-बार पेशाब लगना।
- योनि से पीले द्रव का रीसना।
- योनि में खुजली और जलन।
     यदि गोनोरिया का इलाज नहीं किया जाए तो यह अण्डाशय और डिम्बवाहिनी के सूजन का कारण भी बन सकता है, संक्रमित शरीर के अंदर जोड़ों में यह gonococcus arthritis ( जोड़ों में सूजन) का कारण भी बन सकता है।
* डिंब वाहिनी(fallopian tube) में संक्रमण से PID (pelvic inflammatory disease) श्रोणि शोथज रोग महिलाओं में देखा गया है। इसके मुख्य लक्षण बुखार, कमर और पेट दर्द।
* Pelvic में ज्यादा तकलीफ होने और जल्द उपचार न करने पर गर्भ धारण में समस्या या बांझपन जैसी परेशानी हो सकती है।
* संक्रमण किसी मुख्य स्थान पर अति रुप से हो जाने पर उस जगह सूजन और मवाद बनने (pus formation) जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में सर्जरी (surgery) अति आवश्यक हो जाती है और जीवनदायिनी का काम करती है।
* गोनोरिया संक्रमण प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति में उसके रोग प्रतिरक्षा तंत्र पर निर्भर करता है, कई बार इसकी स्थिति AIDS से भी भयावह(critical) हो सकती है।
गोनोरिया की जांच एवं परीक्षण:
     निसेरिया गोनोरी बैक्टीरिया का परीक्षण, संक्रमित स्थान 
( मुँह के अंदर गला, योनि द्वार, गुदा द्वार) से swabing के द्वारा प्राप्त swab का रसायनशाला (laboratory) में जांच कर के पता लगाया जाता है, swab से प्राप्त  बैक्टीरिया को (culture) संवर्धित (जनन) कराया जाता है, जिससे संख्या में बढ़ने पर उनके जेनेटिक मटेरियल का परीक्षण कर पता लगाया जा सके।
Newer test :- निसेरिया गोनोरी का पता लगाने के लिये।
और PCR (Polymerase chain reaction) के द्वारा बैक्टीरिया का जेनेटिक मटेरियल का पता लगाने के लिये।
हालांकि ये दोनो तरीके culture (संवर्धन) के तरीके से महंगे हैं पर कम समय लेते हैं 
गोनोरिया के उपचार:
     पहले लगभग सभी संक्रमित रोगियों का उपचार एंटीबायोटिक का इंजेक्शन लगा कर कर दिया जाता था, पर अब बैक्टीरिया के स्ट्रैमें परिवर्तन और उनमें एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाने के कारण एंटीबायोटिक का असर उन पर नही पड़ता है।
ज्यादा परेशानी नही होने पर एंटीबायोटिक के द्वारा इलाज किया जाता है।
* योनि द्वार, गुदा द्वार और मूत्रमार्ग संक्रमण का उपचार अधिकतर CEFTRIAXONE का इंजेक्शन लगाकर या मुँह से CEFIXIM (supra) दवा देकर किया जाता है।
* ग्रसनी के संक्रमण का उपचार CEFTRIAXONE का single IM dose दे कर किया जाता है।
गोनोरिया के उपचार में ऐसी दवाएँ उपयोग की जानी चाहिए जो Chlamydia के उपचार में भी सहायक हो, क्यों कि गोनोरिया औरChlamydia एक  ही समय में और एक ही परिस्थितियों में होने की संभावना रहती है, ये दवाएँ हैं-
* Azithromycin (zithromax, Zmax).
* Doxycycline(vibramycin, oracea, adoxa, atridox)
PID से संक्रमित महिला को Doxycycline दिया जाता है, गर्भवती महिला को यह नही दिया जाता है।
गोनोरिया सबसे आसानी से उपचार किया जाने वाला रोग है, क्यों कि यह बैक्टीरिया कुछ खास परिस्थितियों में जीवित रह पाते हैं, Condoms का उपयोग करने से पूरी तरह इस रोग से बचाव किया जा सकता है।
और जानें -
जननांग दाद (genital-herpes-S.T.D.)

-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत। 

Friday, 22 December 2017

मच्छर और बीमारियां (Mosquito and Disease)

मच्छर और बीमारियां 
नमस्कार दोस्तों,
     हम रोजाना अपने आसपास बहुत सी चीजों को देखते हैं, बहुत लोगों से मिलते हैं, इंसानों के अलावा बहुत सारे जीव जंतुओं से भी मिलते हैं। जिनमें से एक महत्वपूर्ण जीव है मच्छर।

     मच्छर बहुत ही सामान्य जीव है जिससे कि हम रोजाना मिलते हैं, खासकर भारत में। भारत में शायद ही कोई ऐसी जगह या व्यक्ति हो जो कि मच्छरों से प्रभावित न हो।  

     मच्छर विश्व के लगभग हर कोनों में पाए जाते हैं और काफी सारी बीमारियों को फैलाने का काम करते हैं। मच्छर बीमारियों को पैदा नहीं करते वे केवल बीमारियों को फैलाने का काम करते हैं। इसलिए मच्छरों को vector कहा जाता है। 
     
      कुछ प्रमुख रोग जो मच्छरों के द्वारा फैलाए जाते हैं 
 NO.  Disease              cause             Mosquito 
 1. Malaria               Plasmodium    Anopheles
                                   (Protozoa) 
2. Zika                     Zika Virus             Aedes 
3. Dengue                Dengue virus       Aedes  
4. Yellow fever       virus                      Aedes 
5. Chikungunya     virus (CHIKV)      Aedes

      एक और जरूरी बात जो जानने वाली है कि जिस किसी भी Virus को arhtropoda के द्वारा फैलाया जाता है उस Virus को Arbovirus कहा जाता है। Arthropoda में सभी छोटे- बडे कीड़े आते हैं जैसे मच्छर, मक्खी, कॉकरोच आदि।

     चलिए हम मच्छर से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्य की बात कर लेते हैं। 
 • केवल मादा (Female) मच्छर ही मनुष्यों और जानवरों को काटती है। 
 • Female Mosquito को प्रजनन के लिये अधिक पोषण की आवश्यकता होती है इसलिए वह हमारा खून चूसती हैं। 
• Male Mosquito अपना भोजन पेड पौधों और फूलों से प्राप्त करते हैं  
• हर साल 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस (world Mosquito day)मनाया जाता है।

     मच्छर पानी के गड्ढे और टंकियों में अपने लार्वा को जन्म देते हैं, हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि पानी की टंकियों और घर के आसपास सफाई रखी जाये और बीमारियों से बचा जाए। 

     मच्छरों को मारने के लिये D.D.T. और B.H.C. का उपयोग किया जाता है। साथ ही Gambusia नाम की मछली का भी उपयोग मच्छरों को नियंत्रित करने में किया जाता है। Gambusia मछली मच्छरों के लार्वा( बच्चे) को खाती है जिससे मछली को भी खाना मिल जाता है और हमें मच्छरों से छुटकारा । Gambusia मछली मलेेरिया की प्रराकृतिक नियंत्रक मानी जाती है। 
और जानें -
विश्व एड्स दिवस (World AIDS day)
-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत।