गंगा नदी का वैज्ञानिक मह्त्व (scientific importance of ganga in hindi)

 नमस्कार दोस्तों,

     आप सभी जानते हैं कि गंगा नदी को पूरे भारत में कितना सम्मान और आदर दिया जाता है, हिंदू समाज ने गंगा नदी को अपनी माँ का दर्जा दिया है,आखिर क्यों ?
      तो दोस्तों आप सभी ने ये देखा होगा कि हमारे घरों में गंगा जल रखा होता है, वह कभी खराब भी नहीं होता और हमेशा उसका उपयोग हम  पूजा पाठ में करते हैं,तो आप यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी भी चीज को खराब  करने के लिए जीवाणु  जिम्मेदार होते हैं, यही बात नदियों के पानी के साथ भी लागू होती है,  जीवाणु(Bacteria) के कारण ही नदियों का पानी खराब हो जाता है।

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अब देखना यह है कि गंगा नदी के पानी में एसी कौन सी खास बात है कि उसका पानी कभी खराब नहीं होता,  और गंगा नदी में स्नान करने से रोगों से बचाव कैसे होता है?
    गंगा नदी के पानी में एक विषाणु (virus ) होता है, जिसका नाम Bdellovibrio bacteriovorus है | जो कि एक बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage ) है,  बैक्टीरियोफेज एक एेसा विषाणु (virus) है जो कि जीवाणु को मारता है और जीवाणु से अपना भोजन प्राप्त करता है ।  इसी कारण से जीवाणु पानी में अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाते और गंगा नदी का पानी हमेशा साफ बना रहता है।

     ठीक उसी तरह जो बहुत से मानव रोग हैं वे बैक्टीरिया के कारण होते हैं और गंगा जल में स्नान करने से बैक्टीरियोफेज उन बैक्टीरिया को मार देता है और हम रोगमुक्त हो जाते हैं।

इसी कारण से गंगा नदी को इतना पवित्र माना जाता है।

अब आपके दिमाग में ये सवाल होगा कि यदि एेसा है तो गंगा नदी आज प्रदूषित क्यों है? तो इसका जवाब है कि आज के समय में गंगा नदी के किनारे जो कारखाने लगाए गए हैं और उनसे बहुत अधिक मात्रा में जो रासायनिक अपशिष्ट(chemical waste ) निकलता है,  और इन रसायनिक अपशिष्ट की वजह से गंगा के पानी में जीवाणु पनप नहीं पाते, और जब बैक्टीरिया जो कि विषाणु बैक्टीरियोफेज का भोजन है, जल में नहीं होगा तो बैक्टीरियोफेज भी जल में कम हो जायेंगे जिसके कारण आज गंगा नदी का जल प्रदूषित हो रहा है।

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