गोनोरिया यौन संचारित रोग(gonorrhoea-S.T.D.)

नमस्कार दोस्तों,

गोनोरिया क्या है ?

गोनोरिया, एक जीवाणु जिसका नाम Neisseria gonorrhoea (निसेरिया गोनोरी) है, के द्वारा फैलाया जाता है, इसे Gonococcus bacteria भी कहते हैं।

गोनोरिया के कारण

इस बैक्टीरिया के फैलने का मुख्य कारण है असुरक्षित यौन संबंध ।
सबसे पुराने समय में पाए जाने वाले यौन संचारित रोगों में से एक है यह। एक बहुत अधिक चर्चित विषय गोनोरिया के बारे में यह है कि यह टॅायलेट सीट, दरवाजे के हैंडल आदि के संपर्क में आने से नही फैलता, इस बैक्टीरिया को जीवित रहने, जनन करने और वृद्धि करने के लिए विशिष्ट परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, परपोषी के बाहर यह ज्यादा समय तक जीवित नही रह सकता , यह केवल शरीर की नमी वाले भाग में अपना जीवन यापन कर सकता है जैसे- योनि, गला, मूत्र नली, व गुदा द्वार में अच्छे से जीवित रह सकता है।

गोनोरिया के लक्षण:

अधिकतर संक्रमित महिलाओं में लक्षण दिखाई नही देते, खासकर तब, जब वो संक्रमण के शुरुआती चरण में हों।
जो लक्षण दिखाइ देते हैं वो हैं…..
– पेशाब करते समय जलन।
– बार-बार पेशाब लगना।
– योनि से पीले द्रव का रीसना।
– योनि में खुजली और जलन।
यदि गोनोरिया का इलाज नहीं किया जाए तो यह अण्डाशय और डिम्बवाहिनी के सूजन का कारण भी बन सकता है, संक्रमित शरीर के अंदर जोड़ों में यह gonococcus arthritis ( जोड़ों में सूजन) का कारण भी बन सकता है।
* डिंब वाहिनी(fallopian tube) में संक्रमण से PID (pelvic inflammatory disease) श्रोणि शोथज रोग महिलाओं में देखा गया है। इसके मुख्य लक्षण बुखार, कमर और पेट दर्द।
* Pelvic में ज्यादा तकलीफ होने और जल्द उपचार न करने पर गर्भ धारण में समस्या या बांझपन जैसी परेशानी हो सकती है।
* संक्रमण किसी मुख्य स्थान पर अति रुप से हो जाने पर उस जगह सूजन और मवाद बनने (pus formation) जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में सर्जरी (surgery) अति आवश्यक हो जाती है और जीवनदायिनी का काम करती है।
* गोनोरिया संक्रमण प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति में उसके रोग प्रतिरक्षा तंत्र पर निर्भर करता है, कई बार इसकी स्थिति AIDS से भी भयावह(critical) हो सकती है।

गोनोरिया

गोनोरिया की जांच एवं परीक्षण:

निसेरिया गोनोरी बैक्टीरिया का परीक्षण, संक्रमित स्थान ( मुँह के अंदर गला, योनि द्वार, गुदा द्वार) से swabing के द्वारा प्राप्त swab का रसायनशाला (laboratory) में जांच कर के पता लगाया जाता है, swab से प्राप्त  बैक्टीरिया को (culture) संवर्धित (जनन) कराया जाता है, जिससे संख्या में बढ़ने पर उनके जेनेटिक मटेरियल का परीक्षण कर पता लगाया जा सके।
Newer test :- निसेरिया गोनोरी का पता लगाने के लिये।
और PCR (Polymerase chain reaction) के द्वारा बैक्टीरिया का जेनेटिक मटेरियल का पता लगाने के लिये।
हालांकि ये दोनो तरीके culture (संवर्धन) के तरीके से महंगे हैं पर कम समय लेते हैं ।

गोनोरिया के उपचार:

पहले लगभग सभी संक्रमित रोगियों का उपचार एंटीबायोटिक का इंजेक्शन लगा कर कर दिया जाता था, पर अब बैक्टीरिया के स्ट्रैन में परिवर्तन और उनमें एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाने के कारण एंटीबायोटिक का असर उन पर नही पड़ता है।
ज्यादा परेशानी नही होने पर एंटीबायोटिक के द्वारा इलाज किया जाता है।
* योनि द्वार, गुदा द्वार और मूत्रमार्ग संक्रमण का उपचार अधिकतर CEFTRIAXONE का इंजेक्शन लगाकर या मुँह से CEFIXIM (supra) दवा देकर किया जाता है।
* ग्रसनी के संक्रमण का उपचार CEFTRIAXONE का single IM dose दे कर किया जाता है।
गोनोरिया के उपचार में ऐसी दवाएँ उपयोग की जानी चाहिए जो Chlamydia के उपचार में भी सहायक हो, क्यों कि गोनोरिया औरChlamydia एक  ही समय में और एक ही परिस्थितियों में होने की संभावना रहती है, ये दवाएँ हैं-
* Azithromycin (zithromax, Zmax).
* Doxycycline(vibramycin, oracea, adoxa, atridox)
PID से संक्रमित महिला को Doxycycline दिया जाता है, गर्भवती महिला को यह नही दिया जाता है।
गोनोरिया सबसे आसानी से उपचार किया जाने वाला रोग है, क्यों कि यह बैक्टीरिया कुछ खास परिस्थितियों में जीवित रह पाते हैं, Condoms का उपयोग करने से पूरी तरह इस रोग से बचाव किया जा सकता है।

और जाने-

जननांग दाद(GENITAL HERPES-STD)

एड्स- Acquired Immunodeficiency Syndrome

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