जननांग दाद(GENITAL HERPES-STD)

नमस्कार दोस्तों,    
     Herpes सामान्य रूप से विषाणु(virus) से होने वाला संक्रामक रोग है, जो कि संक्रमण युक्त व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से, मुख द्वारा या जनन अंग के एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। 
     हर्पिस के विषाणु का नाम है HSV (Herpes simplex virus). एक बार विषाणु जब शरीर में प्रवेश कर लेता है उसके बाद तंत्रिका (neurons) के माध्यम से वह मेरु रज्जु(Spinal cord) के पास स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है। जब व्यक्ति को दाद होना शुरू होता है, तब विषाणु तंत्रिका से संक्रमित स्थान में पहुँच जाते है, ऐसा होने पर उस जगह पर हल्का लालपन(reddish), उभरा हुआ निशान दिखायी देता है। ये लक्षण साप्ताहिक(weekly) या साल में एक(yearly) बार होने वाले भी हो सकते हैं। 

     ये विषाणु (virus) दो प्रकार के होते हैं- HSV1. HSV2. HSV1 के द्वारा अधिकतर मुख (mouth) के द्वारा फैलने वाला herpes होता है, जबकि HSV2 के द्वारा जनन अंग और मलद्वार(anus) के चारों तरफ में होने वाला herpes होता है। इसका सीधा संबंध प्रतिरक्षा तंत्र(immune system) से है, महिलाओं में तनाव के कारण कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र के कारण आसानी से और अधिक समय तक इसका संक्रमण होना पाया जाता है। महिलाओं में संक्रमण काअनुपात अधिक पाया जाता है, क्यों कि इनमें लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते या फिर होते ही नहीं हैं। जिससे विषाणुु, ग्रीवा (cervix) से योनि (vagina) में प्रवेश कर जाता है। 

 हर्पिस के लक्षण:

एक बार संक्रमण होने और उसके लक्षण दिखाई देने का अंतराल 3-7 दिनों का होता है। इस समय विषाणु संक्रमण की संभावना नही होती है, दूसरे सप्ताह से यह संक्रमण संक्रमित होने के लिए तैयार हो जाते हैं, जलन, खुजली, लालिमा, और संक्रमित स्थान पर सूजन । सामान्यतः छूने से दर्द , ये सब लक्षण 2-7 दिन में देखा जा सकता है। इस समय यह संक्रमण करने की अवस्था में होता है । ऐसे संक्रमित स्थान से सीधे ही शारीरिक संबंध बनाने के समय संपर्क में आने पर बड़ी आसानी से दाद फैलता है।

 संक्रमित अल्सर में पाए जाने वाले द्रव के परीक्षण से इसका पता लगाया जाता है जिससे इसकी पुष्टि हो जाती है, लेकिन इस द्रव परीक्षण का परिणाम कभी कभी गलत भी आ जाता है जिससे संक्रमण और ज्यादा बढ़ने का खतरा होता है। 
  रक्त परीक्षण (blood test) के द्वारा और बहुत सटीक परीक्षण PCR (पॅालीमरेज़ चैन रिएक्शन) के द्वारा विषाणु के अनुवांशिक पदार्थ (genetic material) का पता लगा के किया जाता है। 
     इसके उपचार के लिए मुँह से ली जाने वाली दवाएँ ज्यादा असरदार होती हैं। बजाय उनके जो संक्रमित स्थान पर मरहम के रूप में लगाए जाते हैं। एक साल में तीन बार से अधिक यदि संक्रमण होने पर सामान्यतया – *ACYCLOVIR (ZOVIRAX). *FAMCICLOVIR (FAMVIR). *VALACYCLOVIR (VALTREX). Antivaral दवाएँ भी दी जाती हैं, पर लक्षण दिखाई देने के 24घण्टे के भीतर लेने पर यह असरदार होते हैं।
 

Herpes से बचाव 

 संक्रमण होने के बाद बहुत अधिक सावधानी का ध्यान रखना चाहिए 
(1) infected स्थान को छूने के बाद आंखों या मुंह को बिना हाथ धोये नही छुना चाहिए।
(2) couples में यदि एक व्यक्ति को संक्रमण हो गया है तो sex के समय निरोध का उपयोग करना चाहिए।
(3) संक्रमित व्यक्ति के कपड़े साफ व अलग होने चाहिए। 
(4) गर्भवती महिला को यह संक्रमण हो तो अपने डॅाक्टर को जरूर बताएं ताकि कुछ सावधानियों को ध्यान में रखते हुए नवजात बच्चे का जन्म स्वस्थ व सुरक्षित रूप से किया जाए।
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