दिल्ली की जहरीली सुबह

नमस्कार दोस्तों,
नई दिल्ली,   आज हमारे पास नौकरी है,मकान है,गाड़ी है तमाम सुख सुविधाओं से भरी पड़ी है हमारी जिंदगी पर हमारे पास नहीं है तो बस सांस लेने के लिए साफ हवा। दोस्तों हम बात कर रहे हैं हमारे देश की राजधानी दिल्ली की जो दुनिया के सबसे बड़े शहरों में शामिल है। साथ ही साथ दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भी सबसे आगे है।

मंगलवार की सुबह जब लोग बाहर सडकों पर निकले तो चारों ओर साफ ठंडी हवा की जगह काले स्माग को देखते रहे। स्माग धुएँ और कोहरे का मिला जुला रूप है जो कि दिल्ली जैसे बडे शहरों जहाँ मोटरसाइकिल, कार और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएँ की बहुत अधिक मात्रा होती है वहाँ आसानी से देखने मिल जाता है।

डब्लू एच ओ- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO-world health organisation) के अनुसार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हवा वह है जिसमें प्रदूषण करने वाले कणों का आकार 2.5 माइक्रोमीटर होता है। जिसकी मात्रा आजकल दिल्ली की हवा में सामान्य से 30 गुना ज्यादा है। इतना प्रदूषण दिल्ली को विश्व की सबसे प्रदूषित राष्ट्रीय राजधानी बनाता है जो हर एक भारतीय के लिए शर्म की बात है। कुछ आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में एक दिन सांस लेना 50 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान करता है।

स्माग के चलते दिल्ली के सभी स्कूलों को रविवार तक बंद करने के आदेश दिये गये हैं, लोगों को मास्क लगाकर ही सडकों में निकलने के लिए कहा गया है और साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों को भी सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। लेकिन क्या इससे
दिल्ली का प्रदूषण कम होगा?
प्रदूषण करने वाले कोई दूसरी दुनिया के लोग तो नहीं हैं, पर्यावरण को प्रदूषित करने के सबसे बड़े जिम्मेदार हम ही हैं। यह मालूम होते हुए भी -जब हमें आड – ईवन नियम को पालन करने के लिये कहा जाता है, तब हमें गुस्सा आता है।
जब हमें साफ सफाई रखने का आग्रह किया जाता है तो हमारे कानों में जूँ तक नहीं रेंगती।
जब हमें पटाखों को न जलाने की नसीहत दी जाती है तो हमारी संस्कृति खतरे में आ जाती है। जब हम अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझेंगे तो इस समस्या को हल करने कि जिम्मेदारी किसकी होगी?

एक बात हमें हमेशा याद रखनी चाहिए कि यदि प्रकृति को हम सुरक्षित नहीं रख सकते तो वह खुद अपने आप को सुरक्षित करने के उपाय जानती है और उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।

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