हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics in hindi, soilless culture in hindi)

Soil-less Culture in Hindi

क्या आप पौधो को पसन्द करतेे है, आपका आंगन छोटा है, आपके पास ज़मीन की भी कमि है?

तो इन समस्याओं के बाद भी आपको निराश होने की जरूरत नहीं है,  हमारे विज्ञान के पास इसका भी हल है, जिसका नाम है हाइड्रोपोनिक्स(Hydroponics) या बिन मिट्टी के खेती(soilless culture)

जहाँ न तो आपको पौधे लगाने के लिए गमलों की जरूरत है और न ही मिट्टी की,  तो चलिए हाइड्रोपोनिक्स को विस्तृत रूप से समझते हैं।

Why Soil-less Culture ?

आज हमारे शहरों की जीवनशैली बडी बडी ईमारतों वाली हो चुकी है, जहाँ न तो मिट्टी का आँगन है और न ही खुला छत, ऐसे में आप चाहते हुए भी अपने घर में पेड पौधे नहीं लगा सकते।

आपके मन में ये ख्याल आ रहा होगा कि हमारे पास आँगन नहीं है तो क्या हुआ हम गमलों में तो पौधे लगा सकते हैं।

आपने बाजार से मेहनत करके गमले तो ले आए पर उन गमलों के लिए मिट्टी कहाँ से लायेंगे?

क्योंकि आपके बडे से अपार्टमेंट में न ही आँगन है और न ही आपके बडे से शहर में दूर-दूर तक खेत और खलिहान जिससे आप अपने गमलों के लिए मिट्टी ला सकें।

concept of soil-less culture

आपने कभी पानी से भरे ग्लास में या किसी बोतल में किसी पौधे की टहनी रख दी हो तो देखा होगा कि कुछ दिनों के बाद उसमें जड़ें निकल आती हैं और धीरे-धीरे वह पौधा बढ़ने लगता है।

जबकि हम देखते आए हैं कि सामान्यतया पेड़-पौधे जमीन पर ही उगाए जाते हैं। ऐसा लगता है कि पेड़-पौधे उगाने और उनके बड़े होने के लिये खाद, मिट्टी, पानी और सूर्य का प्रकाश जरूरी होता है।

लेकिन सच यह है कि पौधे या फसल उत्पादन के लिये सिर्फ तीन चीजों – पानी, पोषक तत्व और सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।

इस तरह यदि हम बिना मिट्टी के ही पेड़-पौधों को किसी और तरीके से पोषक तत्व उपलब्ध करा दें तो बिना मिट्टी के भी पानी और सूरज के प्रकाश की उपस्थिति में पेड़-पौधे उगा सकते हैं।

हाइड्रोपोनिक्स क्या है?

   केवल पानी में या बालू अथवा कंकड़ों के बीच नियंत्रित जलवायु में बिना मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक कहते हैं।

हाइड्रोपोनिक शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों ‘हाइड्रो’ (Hydro) तथा ‘पोनोस (Ponos) से मिलकर हुई है। हाइड्रो का मतलब है पानी, जबकि पोनोस का अर्थ है कार्य।

इस तकनीक को सबसे पहले  वैज्ञानिक साक्स (julius von sachs) ने खोजा। 

by srb science
hydroponics

हाइड्रोपोनिक्स में पौधों को नियंत्रित परिस्थितियों में 15 से 30 डिग्री सेल्सियस ताप पर लगभग 80 से 85 प्रतिशत नमी में उगाया जाता है।

   सामान्यतया पेड़-पौधे अपने आवश्यक पोषक तत्व जमीन से लेते हैं, लेकिन हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिये पौधों में एक विशेष प्रकार का घोल डाला जाता है।

इस घोल में पौधों की बढ़वार के लिये आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। पानी, कंकड़ों या बालू आदि में उगाए जाने वाले पौधों में इस घोल की महीने में दो-एक बार केवल कुछ बूँदें ही डाली जाती हैं।

इस घोल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक और  आयरन आदि तत्वों को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है, ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें। 

 विश्व और हमारे देश में हाइड्रोपोनिक्स का उपयोग?

  • हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का कई पश्चिमी देशों में फसल उत्पादन के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • हमारे देश में भी राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में जहाँ चारे के उत्पादन के लिये पर्याप्त उपजाऊ जमीन नहीं है।
  • हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से पंजाब में आलू उगाया जा रहा है।
  • इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च के गोवा परिसर में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से हरा चारा उत्पादन की इकाई की स्थापना की गई है।
ऐसी ही दस और इकाइयाँ गोवा की विभिन्न डेरी-कोऑपरेटिव सोसाइटियों में लगाई गई हैं।
 

हाइड्रोपोनिक्स(soil-less culture) के फायदे ?

   परंपरागत तकनीक से पौधे और फसलें उगाने की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के कई लाभ हैं।
इस तकनीक से विपरीत जलवायु परिस्थितियों में उन क्षेत्रों में भी पौधे उगाए जा सकते हैं, जहाँ जमीन की कमी है अथवा वहाँ की मिट्टी उपजाऊ नहीं है।

हाइड्रोपोनिक्स के प्रमुख लाभ

  •  इस तकनीक से बेहद कम खर्च में पौधे और फसलें उगाई जा सकती हैं।

 

  • इस तकनीक में पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिये आवश्यक खनिजों के घोल की कुछ बूँदें ही महीने में केवल एक-दो बार डालने की जरूरत होती है। इसलिये इसकी मदद से आप कहीं भी पौधे उगा सकते हैं।

 

  • पानी की 80% तक बचत, मान लीजिये आपने 2 पौधे लगाए 1 जमीन पर और एक हाइड्रोपोनिक्स पर तो जो जमीन में लगा हुआ पौधा है उसे आपको हाइड्रोपोनिक्स वाले पौधे की तुलना में 80% ज्यादा पानी देना होगा।

 

  • यदि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है तो कई तरह की साक-सब्जियां बड़े पैमाने पर अपने घरों और बड़ी-बड़ी इमारतों में ही उगाई जा सकेंगी। जिससे आप कम कीमत में मंहगी सब्जी का मजा ले सकेंगे।

 

  • चूँकि इस विधि से पैदा किए गए पौधों और फसलों का मिट्टी और जमीन से कोई संबंध नहीं होता, इसलिये इनमें बीमारियाँ कम होती हैं और इसीलिये इनके उत्पादन में कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है।

हाइड्रोपोनिक्स के प्रमुख लाभ

  • चूँकि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों में पोषक तत्वों का विशेष घोल डाला जाता है, इसलिये इसमें उर्वरकों एवं अन्य रासायनिक पदार्थों की आवश्यकता नहीं होती है। जिसका फायदा न केवल हमारे पर्यावरण को होगा, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिये भी अच्छा होगा।

 

  • हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से उगाई गइ सब्ज़ियाँ और पौधे अधिक पौष्टिक होते हैं।
  • हाइड्रोपोनिक्स विधि से न केवल घरों एवं फ्लैटों में पौधे उगाए जा सकते हैं, बल्कि बाहर खेतों में भी फसलें उगाई जा सकती हैं। इस विधि से उगाई गई फसलें और पौधे आधे समय में ही तैयार हो जाते हैं।

 

  • जमीन में उगाए जाने वाले पौधों की अपेक्षा इस तकनीक में बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है। इस तरह यह जमीन और सिंचाई प्रणाली के अतिरिक्त दबाव से छुटकारा दिलाने में सहायक होती है।

 

  • मक्के से तैयार किया गया हाइड्रोपोनिक्स चारा पशुओं के लिए काफी फायदेमंद होता है।

 

  • हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का एक फायदा यह भी है कि इस तकनीक से गेहूँ जैसे अनाजों की पौध 7 से 8 दिन में तैयार हो सकती है, जबकि सामान्यतः इनकी पौध तैयार होने में 28 से 30 दिन लगते हैं।

 हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की चुनौती?

    1. सबसे बड़ी चुनौती तो इस तनकीक को इस्तेमाल करने में आवश्यक शुरुआती खर्चे की है।हाइड्रोपोनिक्स का खर्च शुरुआत में ज्यादा होता है, पर एक दो फसल के बाद यह काफी फायदेमंद हो जाती है।
    2. चूँकि इस विधि में पानी का पंपों की सहायता से पुनः इस्तेमाल किया जाता है, उसके लिये लगातार विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसलिये दूसरी बड़ी चुनौती है हर वक्त विद्युत आपूर्ति बनाए रखना।
    3. लोगों को लगता है कि हाइड्रोपोनिक्स एक बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी है जिसे केवल वैज्ञानिक या बहुत पढा लिखा व्यक्ति ही कर सकता है।
    4. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में तत्वों की आपूर्ति हम करते हैं, जबकि जमीन से पौधे अपने आप लेते रहते हैं। तो ये काम थोड़ा मेहनत वाला है और हम मेहनत करना नहीं चाहते।

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