चमगादड़ अंधेरे में कैसे उडती है?

नमस्कार दोस्तों,
दुनिया बहुत सुंदर है, और साथ ही विचित्र भी, लेकिन टेक्नोलॉजी के इस जमाने में हमारे पास दुनिया को देखने का समय नहीं है। हमारे आसपास पास न जाने कितने ऐसे जीव जंतु हैं जो अपनी दैनिक क्रियाओं को पूरा करने के लिए हमारी आज की टेक्नोलॉजी से कहीं ज्यादा advance technology का use करते हैं। उनमें से एक है चमगादड़।
चमगादड़ एक स्तनधारी (mammal) जीव है जो खुले आसमान में भी उड सकता है और रात के अंधेरे में आसानी से उड सकता है जैसे कि दूसरे जानवर नहीं कर सकते वे केवल दिन के समय आसानी से उड सकते हैं।

 

चमगादड़ को प्रकृति ने ऐसे features दिये हैं जिनकी मदद से चमगादड़ अपने आप को दूसरे जीवों से अलग बनाता है।
हम और हमारे जैसे अनेक जीव जंतु जो कि रात के समय अंधेरे में ठीक से देख भी नहीं सकते वहीं चमगादड़ अंधेरे में ही रहते हैं और ज्यादातर रात के समय ही अपना शिकार करते हैं।
चमगादड़ अपना शिकार कैसे करते हैं?


 

चमगादड़ अपने शिकार को पकडने के लिए SONAR system का उपयोग करते हैं। वही SONAR system जिसका उपयोग हम पनडुब्बियों (submarine), जहाज (ships), और मिसाइलों()में उपयोग करते हैं।

चमगादड़ ultrasonic sound पैदा कर सकते हैं और उन्हें समझ सकते हैं, जो कि दूसरे जीव नहीं कर सकते। चमगादड़ की यहआधाsound तकनीक का उपयोग कर ही आज हमारे बडे-बडे जहाज,पनडुब्बी और मिसाइल दूरी का अंदाजा लगाते हैं।
SONAR system में एक receiver और एक emitter होता है। Emitter के द्वारा ultrasonic waves पैदा किया जाता है और जब ultrasonic waves सामने की वस्तु से टकराकर वापस आती है तब उसे receiver के द्वारा collect कर लिया जाता है, और उस वस्तु को पहचान लिया जाता है।
वस्तु से टकराकर वापस आने वाली तरंगों (waves) की तीव्रता (intensity) और संख्या के आधार पर वस्तु का आकार और दूरी तय की जाती है।
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