निपाह वायरस(NIPAH VIRUS)-NIV virus in hindi

1. ‘NIPAH VIRUS’ in hindi

Scientific World में आज कल ‘निपाह वायरस’ काफी चर्चा में है। सामान्य लोगों में NIPAH VIRUS के बारे में जानने की इच्छा भी है और पूरी जानकारी न होने की वजह से डर भी।


2. NIV क्या है?

1. NIV एक Virus है जिसकी वजह से निपाह (NIPAH) नाम की बीमारी होती है। NIV का पूरा नाम ‘NIPAH VIRUS’ है।

2. NIV Virus सामान्यतः Animals से Fruits और Infected Fruits से Human में फैलता है।

3. निपाह Virus का Genetic Material RNA होता है, ठीक वैसे ही जैसे कि HIV के Virus में होता है।

4. निपाह Virus को Zoonotic Pathogen की Category में रखा जाता है। जिसका मतलब है, ऐसा Virus जो Animal से Human में फैलता है।


3. History of NIV

NIV Virus की History की हम बात करें तो सबसे पहला NIPAH का केस मलेशिया के कम्पंग सुंगाई नाम की जगह में देखने मिला था।

1998 में इस Virus का पता लगा और सुंगाई में ही इस Virus का नाम निपाह पडा।

मलेशिया के बाद 1999 में सिंगापुर में NIV Virus ने एक बार फिर हमला किया।

शुरूआती समय में इस Virus के वाहक (Vector) सुअर थे लेकिन अब इस बीमारी के Vector चमगादड़ भी हैं।

इसके बाद ये बीमारी South Asia में फैल गई (South Asia जिनमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे आते हैं।)

भारत में NIV Virus का पहला केस 2001 में West Bengal के सिलिगुड़ी में देखने मिला।

2007 में एक बार फिर West Bengal के नदिया में यह Virus मिला।

अब 11 साल बाद फिर से 2018 में यह Virus South India में बीमारी फैला रहा है।


4. NIV फैलता कैसे है?

अभी तक निपाह के दो Vector सामने आये हैं।

a. सुअर

b. चमगादड़

Pteropodidae Family की Fruit Bat निपाह वायरस के Natural Host हैं।

मतलब की प्राकृतिक रूप से निपाह का Virus Fruit Bat में हीें Present होता है।

इसके अलावा चमगादड़ की कुछ अन्य Spieace में भी यह Virus देखने मिल जाता है।

ऐसा माना जाता है कि जब Infected Bats किसी Fruit को खाती है तब यह Virus चमगादड़ से Fruit में चला जाता है और आस पास के Fruits में फैल जाता है।

इसके बाद जब हम Infected Fruit खाते हैं, Fruit का Juice पीते हैं या किसी और तरीके से Infected Fruit का Use करते हैं। तब यह Virus हमारी Body में Enter कर जाता है।

NIV का Virus चमगादड़ और सुअर जैसे Animal से जब Human में आता है, उसके बाद यह Human to Human और तेजी से फैलने लगता है।


5. NIV मलेशिया में पहली बार कैसे फैला?

सिंगापुर और मलेशिया में सुअर पालन एक Common Business है, जहाँ एक बडी Population Animal Husbandry पर Depend है।

सुअर पालन करने वाले लोग सीधे सुअर के Contact में थे। जहाँ सुअर के Respiratory Droplets और Nasal Secretion (छींक) से और Sick Pig के Tissue के संपर्क में रहने से ये बीमारी Human में फैल गई।


6. भारत और बांग्लादेश में यह कैसे फैला?

भारत और बांग्लादेश में NIV Virus के फैलने की Story मलेशिया सिंगापुर से कुछ अलग है।

भारत में सबसे पहले NIV, Date Fruit(खजूर) से आया। जब Pteropodidae Family की चमगादड़ खजूर के फलों को खाती तब वह अपनी लार (Saliva), मूत्र (Urine) खजूर में छोड़ देती है।

जब NIV Virus से Infected खजूर के Juice का लोगों ने इस्तेमाल किया तब यह NIV Human में फैलता चला गया।


7. NIV-Incubation Period

सामान्यतया NIV का Incubation Period 4-14 दिनों का होता है। लेकिन कुछ Case में Incubation Period 45-50 दिनों का भी हो सकता है।

(Incubation Period – Virus के Body में पहुचने के बाद लक्षण दिखाई देने में लगा समय)


8. लक्षण – NIV Symptoms

NIV मुख्यतः brain (Nervous System) को प्रभावित करता है।
1. बुखार
2. सिरदर्द
3. दिमागी संदेह (भ्रम)
4. उल्टियां
5. मांसपेशियों में दर्द
6. निमोनिया के लक्षण
7. हल्की बेहोशी
8. दिमागी सूजन


9. डायग्नोसिस

1. वायरस का डायग्नोसिस आरटी-पीसीआर (Polymerase Chain Reaction-PCR) के द्वारा गले- नाक के सेरेब्रोस्पाइनल तरल पदार्थ (Cerebrospinal Fluid) मूत्र (Urine Test)और रक्त का टेस्ट (Blood Test) करके किया जाता है।

2. ELISSA Test की मदद से (आईजीजी और आईजीएम) द्वारा इस वायरस की एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है।

3. ‘निपाह वायरस’ संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकता है। मानव से मानव में संक्रमण के नियंत्रण के लिये बैरियर नर्सिंग तकनीक महत्वपूर्ण है। मतलब कि Disease को ठीक करने की बजाए रोकने पर ज्यादा जोर दिया जाये।

4. ‘निपाह वायरस’ की अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन निपाह वायरस के जी ग्लाइकोप्रोटीन के द्वारा बनाने वाले मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उपयोग पैसिव वैक्सीनेशन के रूप में करने के बाद लाभ पाया गया है।


10. NIV से सुरक्षा

अपने आप को निम्न से सुरक्षित रखें –
1. सुअरों से दूर रहें।

2. ऐसे फल न खाएं, जिन्हें पक्षियों ने काटा हो। फलों को बहुत सावधानी से खरीदें और बाहर के खुले में मिलने वाले जूस का सेवन जरा भी न करें।

3. खजूर न खाएं।

4. चमगादड़ों के आवास के आस पास भी न जाएं।

5. कोई भी यात्रा अत्यावश्यक हो तो ही करें, संभव हो तो न ही करें।

6. चूंकि यह virus अत्यधिक संक्रामक है, इसीलिए बाहर का कुछ भी न खाएं, न पिएं।

7. चूंकि यह सुअरों से भी फैलता है, इसीलिए मांसाहार से भी बचें और ऐसी जगहों से भी, जहां मांसाहार का क्रय विक्रय होता है।

8. अगर कोई भी व्यक्ति संक्रमित होता है, तो तुरंत उसे इंटेंसिव केअर दें और उनके इस्तेमाल की किसी भी वस्तु को अलग रखें।


** ध्यान रखें कि जैव श्रृंखला प्रवेश करने वाला यह नवीनतम वायरस है। इसकी वैक्सीन और दवाइयां अभी प्रयोग के स्तर पर ही हैं।
Intensive Care के अलावा इसका फिलहाल कोई भी इलाज नही है ।

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