न्यूटन के गति के नियम हिंदी में

 न्यूटन दुनिया के उन वैज्ञानिकों में से एक हैं जिन्हे विश्व का बच्चा -बच्चा जानता है।इंग्लैंड के महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ(mathematician) न्यूटन का पूरा नाम sir isaac Newton था। और सर न्यूटन के world famous होने के तो एक नहीं बल्कि बहुत से कारण हैं। जिनमें से एक कारण भौतिकी (physic) में दिये उनके गति के नियम हैं।

न्यूटन के गति के नियम

सन् 1687 में लैटिन भाषा में लिखित न्यूटन के प्रिन्सिपिया मैथेमेटिका में लिखे थे।
सर न्यूटन ने गति के 3 नियम दिये जिन्हें English में law of motion कहा जाता है। ये नियम किसी वस्तु पर लगाये गये बल और उस बल के कारण वस्तु की गति में हुए परिवर्तन को Explain करते हैं।

  न्यूटन के गति का पहला नियम  

कोई भी वस्तु (object) तब तक विराम अवस्था (rest) या सरल रेखा में एक समान गति(uniform motion) की अवस्था में रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल(External Force) न लगाया जाए।

न्यूटन ने गति का दूसरा नियम  

किसी भी पिंड (object) की संवेग (momentum) परिवर्तन की दर लगाये गये बल के समानुपाती होती है। और उसकी दिशा लगाये गये बल की दिशा में होती है।

  न्यूटन के गति का तीसरा  नियम 

प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
 न्यूटन के गति के नियम की व्याख्या (पहला)-गति का पहला नियम कहता है कि कोई भी वस्तु जो चल रही है वह लगातार चलती रहेगी, और जो वस्तु रूकी हुई है वह अपनी जगह में ही रूकी रहेगी, तब तक जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लगाया जाए। गति का पहला नियम जडत्व(Inertia) के नियम पर आधारित है। चलिए एक साधारण से Example से समझते हैं, मान लीजिए एक पेन आपकी table में रखा हुआ है तो वह रखा ही रहेगा जब तक की आप या कोई और उस पेन को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह न ले जायें। वैसे ही एक चलती हुई गाड़ी चलते ही रहेगी जब तक की आप उसे ब्रेक लगाकर न रोकें या किसी और कारण से उसे रोका न जाए।
गति के पहले नियम के उदाहरण –
(1) चलती ट्रेन में एकाएक break लगने पर body को झटका लगना।
(2) चलती गाड़ी से उतरने और अचानक से रूकने पर गिर पडना।
   न्यूटन के गति के नियम की व्याख्या (दूसरा)गति का दूसरा नियम संवेग संरक्षण के नियम पर आधारित है। तो गति का दूसरा नियम यह कहता है कि यदि कोई वस्तु चल रही है और उस पर कोई बाहरी बल लगाया जाता है तो उस वस्तु की गति में परिवर्तन होगा। और वह change लगाये गये बल की दिशा में होगा। मान लीजिए आप बैटिंग कर रहे हैं तब बॉलर की दिशा में ball को मारते हैं तब आप अपनी ओर आने वाली ball की गति की दिशा के विपरीत बल लगाते हैं और जितना बल लगाते हैं ball उतनी दूर जाती है। यहां आपने ball के संवेग को परिवर्तित किया और ball की दिशा के विपरीत बल लगाया। ठीक वैसे ही जब आप उसी ball को विकेट कीपर की दिशा में मारते हैं तो वह ball आसानी से बाउंड्री के पास चले जाती है और मेहनत भी कम करनी होती है। पहली स्थिति में आप ball की दिशा के विपरीत बल लगाते हैं तब ज्यादा work करना होता है और दूसरी स्थिति में कम कार्य क्योंकि बल की दिशा और ball की दिशा एक समान होती है।
गति के दूसरे नियम के उदाहरण –
(1) सामान्य गति से गतिशील bike या कार में Accelerator देना।
(2) क्रिकेट या फुटबॉल में ball को hit करना।
न्यूटन के गति के नियम की व्याख्या (तीसरा) – गति का तीसरा नियम पूरी तरह से विश्व की हर एक गति पर लागू होता है और यह बतलाता है कि आप किसी भी वस्तु पर जितना बल लगायेंगे वह वस्तु भी विपरीत और उतना ही बल वापस लगायेगी। जैसे आप किसी ball को जमीन में जितने बल से नीचे फेंकते हैं वह वापस उतनी ही उपर आती है।

गति के तीसरे नियम के उदाहरण 

(1) कुँए से पानी खींचते हुए रस्सी के टूटने पर पीछे की ओर झुक जाना।
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-धन्यवाद-
।जय हिंद जय भारत।
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